आखिर क्यूँ शांत हो गई मनुआ!!!!

कितनी चंचल हुआ करती थी अब कितनी शांत हो गई है मनुआ ! कल तक तो अच्छी भली खेलती कभी कभी मेरे घर के पिछूआरे तक पहुँच कर ऊधम मचाती , खिलखिलाती , शरारतें करती थी यह कोशी की उच्छृंखल…

आत्म ज्ञान

आत्म ज्ञान रात्रि के अंतिम प्रहर मे जब पूरी दुनिया गहरी नींद मे सो रही होती है जब रतजगी के बाद मौलया चाँद आकाश की बाहो मे सो जाने को आतुर होता है और सारा तेज ताप हूँकार छिपाए आदिम…