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आखिर क्यूँ शांत हो गई मनुआ!!!!

कितनी चंचल हुआ करती थी अब कितनी शांत हो गई है मनुआ ! कल तक तो अच्छी भली खेलती कभी कभी मेरे घर के पिछूआरे तक पहुँच कर ऊधम मचाती , खिलखिलाती , शरारतें करती थी यह कोशी की उच्छृंखल…

आत्म ज्ञान

आत्म ज्ञान रात्रि के अंतिम प्रहर मे जब पूरी दुनिया गहरी नींद मे सो रही होती है जब रतजगी के बाद मौलया चाँद आकाश की बाहो मे सो जाने को आतुर होता है और सारा तेज ताप हूँकार छिपाए आदिम…

जाने कहां गए वो दिन………….

(कक्काजी  स्व.  परमेश्वर  कुमर को याद करते  हुए) आज  की गला –घोंट राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के युग में परमेश्वर कुमर जो एक प्रखर स्वतन्त्रता सेनानी , चौहत्तर  आन्दोलन  के तपे –तपाये   अपनी  मिटटी  से  गहरे  जुड़े  जन-नेता थे, कुछ-कुछ अप्रासंगिक हो …

सामा-चकेवा

सामा-चकेवा दीवाली  और  छठ पर्व  के  साथ  ही  एक  और  अति- विशिष्ट  पर्व का  मैं  बेसब्री  से  इंतज़ार  करने लगता  हूँ  जिसे  हमलोग  सामा –  चकेवा के नाम से जानते  हैं . भाई –बहन  के प्रेम से सराबोर  यह पर्व …