Uncategorized

DateLine Koshi

A few days back I had  gone  to  my  native  place, Mahishi. After completing  the Pooja rituals and  pleasantries  exchanged  with  Badi  Bhabhi  and  others   left  for Saharsa. On  return  journey  visited   a small  stretch  of  eastern Koshi  embankment passing …

मैंने सागर की लहरों पर ,सूरज को मचलते देखा हैं…

    मैंने सागर की लहरों पर सूरज को मचलते देखा है नभ आँगन  कि  देहरी  पर तारो को शरमाते देखा है मैंने सागर की लहरों पर , सूरज को मचलते देखा हैं… भुला-बिसरा बादल भी यदा कदा आ जाता…