CREATIVITY

आखिर क्यूँ शांत हो गई मनुआ!!!!

कितनी चंचल हुआ करती थी अब कितनी शांत हो गई है मनुआ ! कल तक तो अच्छी भली खेलती कभी कभी मेरे घर के पिछूआरे तक पहुँच कर ऊधम मचाती , खिलखिलाती , शरारतें करती थी यह कोशी की उच्छृंखल…

आत्म ज्ञान

आत्म ज्ञान रात्रि के अंतिम प्रहर मे जब पूरी दुनिया गहरी नींद मे सो रही होती है जब रतजगी के बाद मौलया चाँद आकाश की बाहो मे सो जाने को आतुर होता है और सारा तेज ताप हूँकार छिपाए आदिम…

राजकमल को याद करते हुए

राजकमल  को  याद  करते  हुए ………. १९६७  में हुई असमय  मृत्यु के  बाद  राजकमल विरोधाभासों  के  शिकार  बने रहे .आलोचना की  दो  अतिवादी  प्रवृत्तियाँ  उनके  आस-पास  मंडराती  रहीं .एक  वर्ग  उन्हें चिर- विद्रोही ,आवारा  मसीहा  घोषित  और  सिद्ध करने में …